Power of Brain – II                                   सापेक्षता का नियम  (Theory of Relativility)जीवन एक ऐसी शक्ति है , जिसे हर तरफ महसूस किया जा सकता है। आकाश, पाताल और धरती हर जगह इसके अंश किसी रूप में मौजूद हैं।जब से धरती बसी है, इसके कण-कण में बसा जीवन एक लय में थिरक रहा है और इस जीवन के इस लय को निर्धारित करती है गति यानि मोशन (Motion), वो नियम जो पता नहीं कब से गति को निर्धारित करते चले आ रहे हैं, हाँ यह अलग बात है कि मनुष्य को इसकी जानकारी करीब 300 साल पहले हुई।जब दुनिया ने इन नियमों को एक नये नाम से पहचाना।सर आइजक न्यूटन (1682 – 1727)                न्यूटन ने हमें यह वताया कि कोई भी वस्तु स्थिर या एक समान गति की अवस्था में तब तक रह सकती है जब तक कोई बाहरी बल कार्य न करे।ये बल उसकी गति को खास कर के घटा – बढ़ा भी सकती है। परन्तु गति और उसके नियमों के साथ ये iz”u भी उठा की गति का निर्धारण कैसे किया जाय ।जैसे  :- मान ले दो रेलगाड़ी एक ही दिशा में 50 किलोमीटर प्रति घंटा के रफ़्तार से जा रही हो तो उन गाड़ियों में बैठ यात्रियों के लिए दूसरी ट्रेन स्थिर नजर आएगी जब कि प्लेटफॉर्म पर खड़ा व्यक्ति गाड़ियों को 50 किलोमीटर प्रति घंटा के रफ़्तार से चलता हुआ मानेगा ।तो iz”u ये था कि ट्रेन कि गति का मान किसके अनुमान पर निर्धारित किया जाये।  ट्रेन में बैठे व्यक्ति के अनुसार पर या फिर प्लेटफॉर्म पर खड़े व्यक्ति के आधार पर।जबाव था दोनों अपनी अपनी जगह सही हैं।  वस्तु के गति का मान अनुमान लगाने वाले व्यक्ति की स्थिति पर निर्भर करेगा। अर्थात वो स्थिर अवस्था में अनुमान लगा रहा है या गतिशील होकर।संक्षेप में कहे तो निष्कर्ष था गति निरपेक्ष नहीं सापेक्ष है।  पर गति…

Galileo Galilei (15 February 1564[4] – 8 January 1642), was an Italian physicist, mathematician, astronomer, and philosopher who played a major role in the Scientific Revolution. His achievements include improvements to the telescope and consequent astronomical observations and support for Copernicanism.

Charles Robert Darwin, FRS (12 February 1809 – 19 April 1882) was an English naturalist. He established that all species of life have descended over time from common ancestors, and proposed the scientific theory that this branching pattern of evolution resulted from a process that he called natural selection, in which the struggle for existence has a similar effect to the artificial selection involved in selective breeding.